अक्सर ये बात कही जाती है कि भारत की आत्मा गांवो में बस्ती है,भारत ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रधान देश है,भारत क्रषि प्रधान देश है,भारत की सरकार गाँवो से चलती है|लेकिन आजादी के 69 सालो के सफर में हम मायावी विकास की चकाचोध में बहुत आगे निकल आये गए और अपने गाव-देहात,खेत-खलिहान व खेती-किसानी की विरासत को बिसरा बेठे|यह बात तब समाज में आयी जब तीन चार साल पहले पूरी दुनिया ली अर्थव्यवस्था घुटनो के बल बैठ और भारत अपने पैरो के बल खड़ा रहा ,क्योकि इसकी जेड तब भी ग्रामीण अर्थव्यवस्थासे खुराक ले रही थी।
पलायन के बावजूद 83.3 करोड़ जनसख्या अब भी गाँवो में निवास करती है।अगर हमे देश का विकास करना है तो हमें पहले गावो का विकास करना पड़ेगा और गांव के विकास के लिए हमें कृषि का विकास करना पड़ेगा क्योकि गांव के 70% लोग परोक्ष या प्रत्यश रूप से कृषि पर निर्भर करते है। इसलिए सरकार को सोचना पड़ेगा कैसे खेती बंपर पैदावार हो व् उचित दाम मिले ।
गांव के विकास के लिए गांव को सड़को द्वारा भी पड़ेगा । आजादी के इतने साल बाद भी 40% गांव में अब भी हर मौसम में चालू रहने वाली सड़के नही है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार सड़क पर 10 लाख के निवेश से करीब 163 लोग गरीबी से बाहर निकल जाते है । इसलिए सरकार सड़को पर निवेश कर के देश की गरीबी काम करने की राह पकड़ सकती है।
गांव के विकास के लिए शिक्षा भी बहुत जरुरी है । आज भी 36% ग्रामीण निरक्षर है। सरकार की प्रयासों से स्कूलों में बच्चो की सख्या तो बढ़ी है पर बच्चे बिनियादी कौशल भी नही सीख पा रहे है। भारत में शिक्षा पर होने वाले सकल व्यय की 0.8% राशि पूंजीगत व्यय पर जाती है और आधयापको तथा कर्मचारियो के वेतन पर 80%। यानि इफ्रास्ट्रक्चर के लिए बहुत काम रकम बचती है । यो भी हमारा सकल अय्य है उसमे से इफ्रास्ट्रक्चरपर व्यय और भी कम है ।इस व्यय को भी शहरी और ग्रामीण वर्गों में देखेगे तो पाएंगे की दसा दयनीय है।और ऊपर से हमारे मास्टर साहब कमाल के है।
गांव को संचार माध्यम मामले में देखे तो काम सही हुआ है ।आज 6 लाख गांव में से 5 लाख 41 हजार से मोबाइल टावर लग चुके है। ये डिजिटल इंडिया के लिहाज से सही है इसे गावो को डिजिटल की तेजी से आगे बढ़ सकते है।
आज कल कोई भी काम विधुत के बिना संभव नही है इस लिए गावो का विधुतीकरण करना बहुत जरुरी है । सरकार ने 2022 तक हर घर बिजली सातो दिन बिजली का वादा किया है । पर अभी तक गावो में बिजली के नाम पर सिर्फ खाबे है।
केन्द्र व् राज्य सरकार को इन सब पहलु पर काम करने की जरूरत है। तभी गावो का विकास संभव है । जब गावो का विकास होगा तभी देश का विकास सम्भव है।
पलायन के बावजूद 83.3 करोड़ जनसख्या अब भी गाँवो में निवास करती है।अगर हमे देश का विकास करना है तो हमें पहले गावो का विकास करना पड़ेगा और गांव के विकास के लिए हमें कृषि का विकास करना पड़ेगा क्योकि गांव के 70% लोग परोक्ष या प्रत्यश रूप से कृषि पर निर्भर करते है। इसलिए सरकार को सोचना पड़ेगा कैसे खेती बंपर पैदावार हो व् उचित दाम मिले ।
गांव के विकास के लिए गांव को सड़को द्वारा भी पड़ेगा । आजादी के इतने साल बाद भी 40% गांव में अब भी हर मौसम में चालू रहने वाली सड़के नही है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार सड़क पर 10 लाख के निवेश से करीब 163 लोग गरीबी से बाहर निकल जाते है । इसलिए सरकार सड़को पर निवेश कर के देश की गरीबी काम करने की राह पकड़ सकती है।
गांव के विकास के लिए शिक्षा भी बहुत जरुरी है । आज भी 36% ग्रामीण निरक्षर है। सरकार की प्रयासों से स्कूलों में बच्चो की सख्या तो बढ़ी है पर बच्चे बिनियादी कौशल भी नही सीख पा रहे है। भारत में शिक्षा पर होने वाले सकल व्यय की 0.8% राशि पूंजीगत व्यय पर जाती है और आधयापको तथा कर्मचारियो के वेतन पर 80%। यानि इफ्रास्ट्रक्चर के लिए बहुत काम रकम बचती है । यो भी हमारा सकल अय्य है उसमे से इफ्रास्ट्रक्चरपर व्यय और भी कम है ।इस व्यय को भी शहरी और ग्रामीण वर्गों में देखेगे तो पाएंगे की दसा दयनीय है।और ऊपर से हमारे मास्टर साहब कमाल के है।
गांव को संचार माध्यम मामले में देखे तो काम सही हुआ है ।आज 6 लाख गांव में से 5 लाख 41 हजार से मोबाइल टावर लग चुके है। ये डिजिटल इंडिया के लिहाज से सही है इसे गावो को डिजिटल की तेजी से आगे बढ़ सकते है।
आज कल कोई भी काम विधुत के बिना संभव नही है इस लिए गावो का विधुतीकरण करना बहुत जरुरी है । सरकार ने 2022 तक हर घर बिजली सातो दिन बिजली का वादा किया है । पर अभी तक गावो में बिजली के नाम पर सिर्फ खाबे है।
केन्द्र व् राज्य सरकार को इन सब पहलु पर काम करने की जरूरत है। तभी गावो का विकास संभव है । जब गावो का विकास होगा तभी देश का विकास सम्भव है।

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